मूवी रिव्यू -परफैक्ट संस्पेस और थ्रीलर से भरपूर है आयुष्मान खुराना ओैर तब्बू की अंधाधुन

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मूवी रिव्यू:             अंधाधुन

निर्देशक :              श्रीराम राधवन

संगीत :                  अमित त्रिवेदी, रफतार गिरीश नकोड

कलाकार:              आयुष्मान खुराना, राधिका आपटे, तब्बू

जाॅनर  :                  संस्पेस थ्रीलर ड्रामा

रेटिंग :                   स्टार (4.5/5)

फिल्म समीक्षा  :     आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

संस्पेस और थ्रीलर से भरपूर अंधाधून की कहानी इतनी पेचीदा और झटकेदार हैं कि आप एक मिनट भी टस से मस हुए बगैर फिल्म देखने पर मजबूर हो जायेगे । इसकी वजह ये है कि फिल्म मे एक के बाद एक सीन ऐसे प्रस्तुत किये गये हैं कि आप सोच ही नही सकते की आगे की कहानी कया होगी । ऐसे मे अगर आयुष्मान खुराना और तब्बू जैसे मंझे हुए कलाकार हो तो फिल्म का और भी असरदार होना लाजमी है । एक हसीना थी से बतौर डायरेक्टर प्रसिध्दी पाने वाले डायरेक्टर श्रीराम राधवन से इस फिल्म मे तो कमाल ही कर दिया है। पूरी की पूरी कहानी इतनी चोकाने वाली है कि आखिरी सीन तक दर्शको का समझ पाना मुश्किल है कि अब क्या होगा । वही दुसरी तरफ तब्बू का किरदार दर्शको के बीच पूरे वक्त संस्पेस और थ्रील बनाये रखता है।

कहानी —- फिल्म की कहानी प्यानेा प्लेयर आकाश की जिंदगी से शुरू होती है जो काला चश्मा लगाकर प्यानो बजाता है और नेत्रहीन है । जिसकी मुलाकात एक दिन सोफी अर्थात राधिका आपटै से होती है राधिका आपटे अपने होटल मे प्यानो बजाने के लिये आकाश को नौकरी दे देती हेै जंहा पर उसकी मुलाकात पुराने एक्टर अनिल धवन से होती है जिसकी पत्नी तब्बू हेाती है आयुष्मान अनिल धवन के धर प्यानो बजाने जाता है जंहा पर जाकर कुछ ऐसा हेाता है जिसे देखने के बाद सिर्फ अंधे आकाश के ही नही आपके भी होश उड जायेगे । फिल्म मे ऐसा क्या होता है ये आपको देखने के लिये थियेटर तक जाना होगा ।

अभिनय —- अभिनय की अगर बात करे तो सीधे सादे सज्जन और शरीफ दिखने वाले आयुष्मान खुराना जब भी किसी फिल्म मे नजर आते हैं बस कमाल ही कर देते हैं लेकिन उनके चेहरे पर कभी ऐसे भाव भी नही आते कि वो कमाल के एक्टर है। शायद यही उनकी खासियत है। तब्बू ने सिमी का किरदार निभा कर और अपने अभिनय के जैाहर दिखाकर एक बार फिर से साबित कर दिया कि अभिनय मे उनका कोई हाथ नही पकड सकता ।वो एक बेहतरीन एक्ट्रेस हें। । बाकी सारे कलाकारो ने भी अपने किरदारो के साथ पूरा न्याय किया है।

डायरेक्शन —- एक हसीना थी, एजेंट विनोद, बदलापुर, कहानी का डायरेक्शन कर चुके श्रीराम राधवन एक बार अंधाधुन जैसी बेहतरीन फिल्म का बेहतरीन डायरेक्शन करके कमाल कर गये हैं। इस फिलम का डायरैक्शन उन्होने इतनी खुबसूरती से किया है कि दर्शक अपनी सीट से चिपके रहने पर मजबूर हो जायेगे । फिल्म के आखिरी सीन तक संस्पेस और थ्रील बना रहता है जो रोमांचक से भरपूर है।

फिल्म देखे कि ना देखे —- काफी समय बाद संस्पेस और थ्रीलर से भरपूर एक बेहतरीन फिल्म प्रस्तुत हुइ्र है जो दर्शको को निश्चित ही प्रभावित करेगी ।

 

 

 




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