रेड मूवी रिव्यू , इनकम टैक्स आफिसर की ईमानदारी को दर्शाती अजय देवगन की रेड

RAID Newमूवी रिव्यू – रेड

जॉनर – वास्तविक घटना पर आधारित

प्रोडक्शन – पेनोरमा स्टूडियो

कलाकार- अजय देवगन, इलियाना डीक्रूज, सौरभ शुक्ला,सानंद वर्मा , गायत्री अय्यर

निर्देशक – राजकुमार गुप्ता

निर्माता – अभिषेक पाठक कुमार मंगल पाठक किशन कुमार और भूषण कुमार 

संगीत – अमित त्रिवेदी, तनिष्क बागची

रेटिंग – (4/5)

फिल्म समीक्षक – आरती सक्सेना मुंबई

अजय देवगन अभिनीत रेड वास्तविक घटना पर आधारित है जो ८० के दशक मे एक पावरफुल राजनीतिक और एक ईमानदार इनकम टैक्स आफिसर की वास्तविक कहानी पर आधारित है रेड के पोस्टर और ने पहले से ही दर्शको के बीच उत्साह पैदा कर दिया था लेकिन अब आज की रेड फिल्म की रिलीज़ देशको को निराश नहीं करेगी क्योकि इस फिल्म की कहानी और राइट स्क्रिन प्ले दर्शको को अपनी जगह से हिलने का भी समय नहीं देगी तो आइये जानते है रेड की कहानी और फिल्म निर्माण के बारे मे ..

कहानी….. फिल्म रेड की कहानी उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर मे सन 1981 मे की गई एक नामी रेड की घटना पर आधारित है , पूर्व मे एयर लिफ्ट और पिंक जैसी सफल और सक्षम फिल्म लिख चुके लेखक रितेश शाह ने रेड की कहानी को भी खूबसूरती से एक धागे मे पिरोया है इस माले की अगर पहली कड़ी अजय देवगन है तो आखरी कड़ी सशक्त अभिनेता सौरभ शुक्ला है फिल्म की कहानी ईमानदार इनकम टैक्स अधिकारी अमय पटनायक अजय देवगन की ख़ुफ़िया जानकारी से सुरु होती है जिसे एक खबर मिलती है की लखनऊर के ताऊ कहे जाने वाले मालदार राजनीतिक रामेश्वर सिंह सौरभ शुक्ला के घर पर करोडो का काला धन छिपा है। अभय जब रेड मारने अपनी टीम से साथ बलसाली और धनी रामेश्वर सिंह के घर पहुँचता है तो उसके लिए ये रेड कितनी चुनौती पूर्ण और मुश्किलों से भरी होती है। वही इस फिल्म को बहुत ही खूबसूरती के साथ दर्शाया गया है जो बिलकुल वास्तव नजर आता है।कही भी बनावटी नहीं लगता..

डायरेक्शन .. डायरेक्टर राज कुमार गुप्ता ने फिल्म के डायरेक्शन मे कही कोई कमी नहीं राखी है रेड का डायरेक्शन टू दी प्वाइंट है , कही भी कोई भी दृश्य जबरजस्ती ठुंसा हुवा नहीं लगता , इस फिल्म की खासियत ये है कि फिल्म देखते वक्त ऐसा महसूस होता है जैसे सचमुच हो रहा है कोई फिल्म नहीं है डायरेक्टर ने घर के माहौल को रामेश्वर सिंह के दबदबे को घर के सदस्यों को बहुत ही खूबसूरत तरीके से प्रस्तुत किया है , जो एकदम यथार्त को दर्शता है पूरी फिल्म मे कही भी बिना वजह कि हिंसा या बेवजह के सवांदो को दूर रखा गया है , अगर इसे फैमिली मूवी कहेंगे तो भी गलत न होगा राजकुमार से अपने डायरेक्शन के तहत बहुत ही सादगी से बारीक़ से बारीक़ चीजों का ध्यान रखा है जो सराहनीय है।

संगीत .. फिल्म का संगीत कहानी के हिसाब से अच्छा बन पड़ा है फिल्म का संगीत कि फिल्म के मूड के हिसाब से पूरी तरह मैच होता है। क्युकी फिल्म मे संगीत कि ज्यादा जगह नहीं थी इस लिए हलके फुल्के ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जो कर्णप्रिय लगता है। ….

raidddअभिनय .. रेड फिल्म मे अजय देवगन ने अपनी सशक्त अभिनय प्रतिभा दिखाकर एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर एक्टर अच्छा है तो वह हर मुश्किल को भी आसान तरीके से प्रस्तुत कर देता है ,इस फिल्म मे अजय देवगन एक डैम शांत गंभीर और तेज तर्रार इनकम टैक्स आफिसर के किरदार मे नज़र आये है और अपने किरदार के साथ अजय देवगन ने पूरी तरह न्याय किया है , जो एक एक्टर के तौर पर उनको और ज्यादा पहचान दिलाने मे कामयाब होगा , इस फिल्म के मुख्य आकर्षण सौरभ शुक्ला है जिन्होंने अपनी दमदार अभिनय के साथ पूरी समा बांध के रखा है। सौरभ शुक्ला ने गहराई के साथ बोली अपनी सवांद अदायगी को जिस खूबसूरत तरीके से प्रस्तुत किया है वो कबीले तारीफ है। रेड के बाकी किरदार बिलकुल उसी तरह है जैसे एक माला मे सिमटे मोती होते है रामेश्वर के घर का हर सदस्य अपने किरदार के हिसाब से नेचुरल लगा है। खास तौर पर रामेश्वर कि माँ का किरदार निभाने वाली बृद्ध महिला ने फिल्म मे मनोरंजन का पट डाल दिया है इस बृद्ध महिला को देखकर दर्शको को अपने घर कि दादी नानी जरूर याद आयेगी जो कि बूढ़ी होने के साथ साथ भोली भली और नटखट स्वभाव की हुवा कराती थी और घर का मुख्य आकर्षण भी होती है फिल्म की हीरोइन इलियाना डिक्रूज अपने छोटे किरदार मे काफी खूबसूरत नजर आई है उनके लिए फिल्म मे करने के लिये कुछ खास था ही नहीं, लेकिन अपनी छोटी सी भूमिका के साथ उन्होंने पूरी तरह न्याय किया है।

फिल्मकी खासियत .. फिल्म की खासियत रेड के दौरान जो छिपे हुए काले धन उजागर होते है और जिस तरह से कहा कहा ख़ुफ़िया तरीके से धन छिपाया जाता है वो देखना काफी एक्साइटमेंट भरा लगता है। साथ ही रेड क दौरान रामेश्वर द्वारा आफिसर को डराया धमकाया जाना साथ ही घुस देने का लालच देना आदि कई दृश्य फिल्म को न सिर्फ आकर्षण बनाते है बल्कि यथार्त से भी परिपूर्ण लगते है जो कही भी बोरिंग नहीं बल्कि दिलचस्प नज़र आते है , फिल्म का डायरेक्शन और फिल्म का छायांकन अलफांस रायने किया है जो काफी पावरफूल है खास तौर पर फिल्म के संवाद जहा काफी हलके फुल्के ढंग से बोले गये है वही इन डायलॉग मे गहराई भी नज़र आती है फिल्म के डायलॉग फिल्म की खासियत है , जो दर्शक को प्रभावित करे बिना नहीं रह पायेंगे,




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