मूवी रिव्यू – आर्टिकल 15

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मूवी रिव्यू : आर्टिकल 15 – सच्चाई को सादगी से दर्शाती बेहतरीन फिल्म है आर्टिकल 15

निर्देशक : अनुभव सिन्हा

कलाकार : आयुष्मान खुराना,ईशा तलवार,मनोज पाहवा,कुमुद मिश्रा,मोहम्मद जीशान अयूब

रेटिंग : स्टार (4/5)

फिल्म समीक्षा : आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

आर्टिकल 15 हमारे भारत देश का एक ऐसा आईना है जिसे देखने के बाद हम सोचने पर मजबूर हो जायेगे क्या वाकई हमारा भारत देश महान है । क्या यंहा पर इंसान को इंसान की तरह जीने का हक दिया जाता है ? क्या यंहा की नारी तो छोड़ ही दीजिए बच्चिंया भी सुरक्षित हैं ? क्या यहा पर इसांन के रूप मे सिर्फ इंसान ही रहते हैं या सभ्यता का जामा ओढे शैतान धूमते हैं। जो एक मौका नही छोड़ते उन कमजोर इंसानो को धर दबोचने का जो कमजोर है कंगाल है गरीब है और नीची जाति के है। इन्ही सभी सच्चाई को बिना भाषण बाजी किये हुए निर्देशक अनुभव सिन्हा ने बहुत खुबसूरती से दर्शाया है ।आर्टिकल 15 की खास बात ये भी है कि ये फिल्म बलात्कार पर आधारित हैं लैकिन बलात्कार के नाम पर एक भी गंदा या दिल दहलाने वाला सीन नही है जिसमे कि छेाटी बच्चियो के साथ बलात्कार करते हुए दिखाया हो । बच्चियो की दर्दनाक मौत उनकी हालत का बया कर देती हैं बच्चियो की लाशे देखने के बाद समझने मे देर नही लगती कि उनके साथ क्या हुआ होगा । इसके अलावा फिल्म की एक खुबसूरती ये भी है कि आर्टिकल 15 के जरिये जातिवाद का सहारा लेकर भर्ष्टाचार की हद को दिखाया गया है उंचे पद से नीचे से चपरासी तक लोग कैसे भर्ष्टाचार मे डुबे है फिल्म का मुख्य आर्कशण है फिर भी फिल्म कही सड़ी गली नजर नही आती । बल्कि उस भर्ष्टाचार को हटाने के लिये लोग एक ईमानदार का साथ कैसे देते हैं इस फिल्म का आकर्षण प्वाइंट है । इन सभी बातो के चलते आर्टिकल 15 के लिये कह सकते हैं कि ये फिल्म हर तरीके से परफैक्ट है और इसे पूरे पांच मिलने चाहिये लेकिन चुकि ये फिल्म एक अलग तरह की फिल्म है और हो सकता है कि ये फिल्म हर वर्ग के लोगो को ना पसंद आये इस लिये इसे चार स्टार देना हमारी मजबुरी है । लेकिन अगर आर्टिकल 15 पूरी फिल्म की बात करे तो अभिनय से लेकर डायरेक्शन तक स्क्रीन प्ले डायलाॅग लोकेशन सभी कुछ एक दम परफैक्ट है और ये फिल्म निष्चित तौर पर देखने लायक है ।

फिल्म की कहानी ….आई पी एस अधिकारी आयान रंजन आयुष्मान खुराना को मध्य प्रदेश के लाल गांव पुलिस स्टेशन मे चार्ज दिया जाता है । यूरोप से पढ़ाई करके लौटा आयान रंजन इस जिले मे आकर सब कुछ जानने को बेहद उत्सुक है लेकिन साथ ही आयान यंहा की दुनिया रहन सहन को देखकर थोड़ा परेशान और आस्चर्य चकित भी है जिसकी खबर वो अपनी प्रेमिका अदिती ईशा तलवार को मैसेज के जरिये बताता है । अभी आयान ठीक से कुछ समझ ही पाता कि तभी उसे तीन दलित लड़कियो की गांव से गायब होने की खबर मिलती है उन तीन गायब लड़कियो की एफ आई आर भी पुलिस स्टेशन मे दर्ज नही होते । ऐसा ना करने की वजह अन्य दो पुलिस अधिकारी मजोज पाहवा और कुमुद मिश्रा आयान को बताते हैं कि यंहा पर अक्सर ऐसा होता रहता है । और कुछ हफ्तों बाद लड़कियां अपने आप वापस लौट आती है। लेकिन दो दिन बाद ही दो लड़कियो की लाश पेड़ से लटकी मिलती है पुलिस वाले उस भी दलित लोगेा का ही कारनामा बताते हैं लेकिन वंही मौजूद एक दलित लड़की सयानी गुप्ता की आंखो से आयान को शक हो जाता है कि माजरा कुछ और ही है ।आयान जब इस हत्या की साजिष तक जाने की कोशिश करता है तो पाता है कि जातिवाद के नाम पर मंत्री से संत्री तक सी बी आई सभी भर्ष्टाचार के दलदल मे फंसे नजर आते हैं। लेकिन आयान ठान लेता है कि वो इस हत्या ओर भर्ष्टाचार का भांडा फोड के रहेगा । जिसमे उसका साथ वही नौकरी कर रहे पुलिस वाले और दलित गांव वाले देते है। जिनको हिकारत की नजर से देखा जाता है । आखिरकार जीत सच्चाई की होती हेेै जिसे बेहद खुबसूरती से प्रस्तुत किया गया है।

अभिनय .. अगर अभिनय की बात करे तो आयुष्मान खुराना एक ऐस एक्टर है जिनके अभिनय मे सादगी है लेकिन उनका अभिनय सफलता की उचाईयो को छूता है । मुश्किल से मुश्किल काम वो इतनी आसानी से और इतनी सादगी से कर जाते हैं कि लगता ही नही कि वो अभिनय कर रहे हैं। इसके अलावा कलाकारो से सही अभिनय करवाना भी एक कला है जो डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने कर दिखाया है ।आर्टिकल 15 के छोटे से छोटे कलाकार ने भी इतनी बेहतरीन एक्ट्रिग की है कि परदे पर से दर्शको की नजर ही नही हट पाती । यर्थातवादी और थ्रीलर को दर्शाती आर्टिकल 15 दर्शको को दातो तले उगंली दबाने पर मजबूर कर देती है ।

डायरेक्शन …. फिल्म के डायरेक्टर अनुभव सिन्हा ने इस फिल्म से साबित कर दिया है कि वो एक बेहतरीन डायरेक्टर है । देखा जाए तो बलात्कार पर पहले भी कई फिल्मे बनी है । लेकिन अनुभव सिन्हा ने इस फिल्म मे बलात्कार जैसे गंभीर विषय विशय को जिस तरह से प्रस्तुत किया है । वो काबिल तारीफ है । फिल्म कही भी पकाउ या उबाउ नही लगती फिल्म का हर सीन देखने लायक और दिल दहलाने वाला है । अनुभव सिन्हा के डायरेक्शन के तहत दर्शको इस फिल्म मे इतना इन्वालव हो जातेे है कि सीट पर से उठ ही नही पाते । अनुभव सिन्हा का परफैक्ट डायरेक्शन कबीले तारीफ है ।

संगीत….. अर्टिकल 15 का संगीत मध्यम स्तर का है लेकिन फिल्म का बेकग्राउड म्यूजिक बहुत ही अच्छा बन पड़ा है । जिसे सुनने के बाद दशकों के रोंगटे खड़े हो जाते है।

फिल्म के प्लस माइनस प्वाइंट …  आर्टिकल 15 मे कई सारे प्लस प्वाइट है जिसे दर्शको महसूस करेगे । लेकिन फिल्म मे अगर माइनस प्वाइंट की बात करे तो ये एंटरटेनिंग फिल्म नही है इसमे मनोरंजन का नामो निशान नही है। इस डार्क फिल्म कहना भी गलत ना हेागा। लिहाजा अगर जो दर्शक मनेारंजन के हिसाब से फिल्म देखने जाते हैं और यर्थातवादी फिल्मो मे दिलचस्पी नही रखते उनको ये फिल्म निराश कर सकती है




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