मूवी रिव्यू- बधाई की हकदार है बधाई हो 

badhai hogya p

मूवी रिव्यू      :        बधाई हो

निर्देशक         :       अमित रवीन्द्रनाथ शर्मा

कलाकार        :      आयुष्मान खुराना , सान्या मल्होत्रा, नीना गुप्ता , गजराज राव , सुरेखा सीकरी

जाॅनर              :       फैमिली कामेडी मेलोडियस ड्रामा

रेटिंग             :       स्टार (3.5/5)

समीक्षा          :       आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

काफी सालो पहले एक गाना आया था ना उम्र की सीमा हो ना जन्म का हो बंधन जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन । अलबत्ता ये गाना लिखने वाले और गाने वाले को ये नही पता था कि अगर बड़ी उम्र मे प्यार का रिजल्ट बच्चे के रूप मे सामने आ जाए तो कितनी बेइज्जती सहन करनी पड़ सकती है। बड़ी उम्र मे प्यार तो एक बार समझ आता है लेकिन अगर उस प्यार का फल बच्चे के रूप मे सामने आ जाता है तो प्यार करने वाले फिर पति पत्नी ही क्यो ना मुंह दिखाने लायक नही होते । वो हर जगह हंसी का पात्र बन जाते हैं । ऐसा ही कुछ फिल्म बधाई हो बधाई मे दिखाया गया है । जिसे बड़ी उम्र की नीना गुप्ता और एक्टर नागराज ने बहुत ही खुबसूरती से निभाया है। इसी के साथ एक सच ये भी है फिल्म मे दर्शाया गया है कि अगर आपका प्यार सच्चा है और आपकी नीयत अच्छी है तो पराये भले ही आपको एक बार मजाक का भागीदार बना दे । लेकिन अपने आप का साथ जरूर देते हेैं छोटे बजट की इस बड़ी सीख वाली फिल्म ने अपनी दिल को छूने वाली कहानी से दर्शको का दिल भी जीतने का पूरा प्रोग्राम बना लिया है ।

कहानी ——- दशहरे के मौके पर रिलीज होने जा रही फिल्म बधाई हो की कहानी की शुरूवात एक ऐसे नवयुवक नकुल आयुष्मान खुराना की जिंदगी से होती है जो कालेज खत्म होने के बाद एक फर्म मे नौकरी करने लगता है जंहा उसका प्यार रिनी सान्या मल्होत्रा से हो जाता है । नकूल अभी अपनी प्यार को शादी का रूप देने की योजना बना ही रहा हेाता है कि उसकेा एक झटकेदार खबर सुनने को मिलती हे जिसे सुनने के बाद उसके पंाव तले जमीन खिसक जाती है। और वो खबर ये होती है कि उसके पिता जी गजराज राव जो पेशे से टी सी है और रिटायरमेट के करीब है वो अपनी पत्नी नीना गुप्ता को गर्भवती करके पिता बनने वाले हैं । इतनी बड़ी उम्र मे अपनी मां को गर्भवती होते देख नकूल शरम से पानी पानी हो जाता हे और अपने देास्तो रिश्तेदारो और प्रेमिका तक से नजरे चुराने लगता है ।इतना हीनही बड़ी उम्र मे गर्भवती हेाने की वजह से नीना गुप्ता नकूल की मां को भी बहुत बेइज्जती सहन करनी पडती है। इतना सब होने के बाद क्या नकूल अपने धर आने वाले नये मेहमान का स्वागत करते है क्या नकूल की मां बच्चे को जनम देती है । आने वाले बच्चे का स्वागत क्या नकूल और उसके परिवार वाले कर पाते हैं । ऐसे ही कई सवालो का जवाब आपको मिलेगा जब आप बधाई हो देखने थियेटर तक जायेगे ।

अभिनय —— अगर अभिनय की बात करे तो इस फिल्म के हर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े पात्र जेसे दादी पड़ोसी छोटा भाई सभी ने अपना किरदार एक दम सटीक ढंग से निभाया है। अगर इस फिल्म मे अभिनय के लिये कोई सबसे जयादा श्रेय पाने का हकदार है तो वह है नीना गुप्ता । नीना गुप्ता ने इस फिल्म मे इतना बेहतरीन अभिनय किया है कि उनकेा देखने के बाद आप अपनी मां को एक बार जरूर याद करेगे । नीना गुप्ता ने अपने किरदार मे जो ममतामई भावना का प्रदर्शन किया है वो काबिले तारीफ है।इसके अलावा बड़ी उम्र मे मां बनने की बेइज्जती और खुशी को उनहोने जिस तरह से अभिनय मे पिरोया है वो फिल्म की कहानी मे चार चांद लगा देता है। नीना गुप्ता के पति बने गजराज राव ने भी अपना किरदार बहुत ही खुबसूरती से निभाया है इस फिल्म मे निभाये अपने किरदार मे उनहोने साबित कर दिया है कि वो अच्छे एक्टर हैं। दादी के किरदार मे सुरेखा सीकरी ने दबग सास के रूप मे धमाल ही मचा दिया है। बाकी अगर हीरेा और हीरेाइन की बात करे तो हीरेाइन सान्या मल्होत्रा ने अपना किरदार पूरी ईमानदारी से निभाया है। और इस फिल्म के मुख्य किरदार आयुष्मान खुराना जो भी करते हैं कमाल ही करते हेै। उनकी हर फिल्म मे एक खास बात हेाती है। जो सादगी का जामा ओढे लाख टके की बात कह जाती है। फिर चाहे वो दम लगा कि हईशा हो विक्की डोनर हो या अध्ंधुन ही कयो ना हो ।बधाई हो मे भी आयुष्मान खुराना ने लाजवाब अभिनय किया हैं ।

डायरेक्शन ——– बधाई हो का डायरेक्शन अमित रवीन्द्रनाथ शर्मा ने किया है जो बहुत ही खुबसूरत ढंग से और सादगी के साथ प्रस्तुत किया गया है। अगर डायरेक्शन की बात करे तो फिल्म का डायरेक्शन परफैक्ट हैं । पूरी फिल्म केा डायरेक्टर ने अपनी तगडी स्क्रिप्ट के जरिये बांधे रखा है। फिल्म सादगी से भरपूर है। लेकिन कही भी डायरेक्टर ने अपनी पकड़ ढिली नही छोडी है और ना ही कुछ भी बेवजह ठूसा है। ऐसे मे कह सकते हैं कि बधाई हो का डायरेक्शन टू दी प्वाइट हैं ।

संगीत —– फिल्म का संगीत भी अच्छा बन पड़ा है। फिल्म के मूड के हिसाब से एक दम सही तरीके से प्रस्तुत किया गया हैं ।

फिल्म देखे कि ना देखे —– दशहरे के मौके पर बधाई हो का प्रदर्शन दर्शको के लिये नायाब तोहफा है जो दर्शको केा सिर्फ हंसायेगा ही नही बल्कि एक सीख भी देगा । जो लोग अपने परिवार से प्यार करते हैं और उनकेा हमेशा अपने करीब महसूस करते हैं उनको ये फिल्म जरूर पंसद आयेगी।

 




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *