मूवी रिव्यू – प्यार कलंक नही इबादत है 

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फिल्म :           कलंक

निर्माता :         साजिद नड़ियाद वाला, करण जौहर , हीरो जौहर ,अर्पूवा मेहता

डायरेक्टर:     अभिषेक बर्मन

कलाकार:       माधुरी दीक्षित नेने , संजय दत्त , आलिया भट्ट, वरुण धवन, सोनाक्षी सिन्हा और आदित्य राय कपूर

संगीतकार :    प्रीतम अंकित बल्हारा

शैली :             रोमांटिक एतिहासिक ड्रामा

रेटिंग :           स्टार (3.5/5)

फिल्म समीक्षा : आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

जब भी कभी मल्टी स्टारर फिल्म बनती हैं तो उस वक्त डायरेक्टर का सबसे अहम कार्य होता है हर किरदार को सही ढंग से पेश करना और साथ ही कहानी की गारिमा को भी बनाये रखना । और अगर डायरेक्टर ऐसा करने मे सफल होता है तो वह फिल्म भी एक नया इतिहास रचती है ।

ऐसा ही कुछ करण जौहर की फिल्म कलंक मे देखने को मिला । आजादी के पहले हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान की कहानी पर बनी फिल्म कलंक मे माधुरी , संजय दत्त , आदित्य सोनाक्षी और आलिया, वरूण जैसे परिपक्व कलाकारो को लिया गया है । जिनकी अपनी अपनी अलग कहानी है जो एक माला मे पिरोये मोती की तरह एक दुसरे से जुडी हुई है कलंक के डायरेक्टर ने सभी को पूरी शिददत से प्रस्तुत किया है और किसी भी किरदार को कमजोर नही पड़ने दिया है जो काबिले तारीफ है ।

klk3कहानी — फिल्म की कहानी शुरू होती है आजादी से पहले पाकिस्तान के हुस्नाबाद शहर से जो लाहौर का एक हिस्सा है। देव चैधरी आदित्य राय कपूर की पत्नी सत्या सोनाक्षी सिन्हा कैसंर से जूझ रही होती हैं डाक्टर ने सत्या को एक साल का समय दिया होता है लिहाजा सत्या चाहती है कि उसके रहते ही उसके पति देव की शादी हो जाए । इसी के तहत शास्त्रीय संगीत सिखाने वाले शिक्षक से सोनाक्षी रूप आलिया भटट का सौदा करती है इस सौदे के तहत अगर रूप आदित्य से शादी करेगी तो बदले मे वो रूप की दोनो बहनो की शादी और शिक्षा का कार्य भार संभालेगी । बहनो के भविश्य के लिये रूप देव से शादी कर लेती है। साथ ही अपना मन बहलाने के लिये रूप कोठे वाली बहार बेगम अर्थात माधुरी दीक्षित से शास्त्रीय संगीत सिखने की मांग करती हैं यंहा पर उसे नाजायज औलाद कहलाने वाला वरूण धवन मिलता है और रूप केा वरूण धवन से प्यार हो जाता है वरूण रूप के ससुर बलराज चैाधरी और बहार बेगम की नाजायज औलाद है। जो कि पेशे से लुहार हैं और अग्रेजी मशीनों के खिलाफ है। सारे मुस्लमान अंग्रेजी मशीनों के लिखाफ है लेकिन फिर भी जब अंगेजी मशीने हुस्नाबाद पहुच जाती है तो मुसलमान बगावत कर देते हैं और इन सब मे काफी मारकाट हेाती है। देव चैधरी जो हिन्दू है औ स्टील फैक्टरी का सर्पोट करते हैं उनकी और उनकी पत्नी रूप की जान के लाले पड़ जाते हें इसके आगे कया होता है ये दखेने के लिये आपको सिनेमा धरो तक जाना हेागा ।

डायरेक्शन  —- फिल्म का डायरेक्शन अभिशेक बर्मन ने किया है जो टू दी प्वाइंट है। डायरेक्टर ने हर किरदार को प्रस्तुत करने मे पूरा न्याय किया है। पूरी फिल्म को बहुत अच्छे से पेश किया है। जंहा एक और डायलाॅग स्क्रीन प्ले टाइट है वही फिल्म की लोकेशन और सैट भी देखने लायक है । सही शब्दों मे कहा जाए तो डायरेक्टर ने फिल्म के साथ पूरी तरह न्याय किया है

अभिनय — अभिनय की अगर बात करे तो नवोदित सारे कलाकारेा मे आलिया भटट और वरूण धवन बाजी मार ले गये है। आलिया वरूण की केमिस्ट्री फिल्म मे बहुत ही बेहतर नजर आई है । गली बाॅय के बाद इस फिल्म मे भी आलिया ने कमाल ही कर दिया है देव चैधरी के रोल मे आदित्य राय कपूर ने भी बेहतरीन परफोरमेस दिया है देव की पत्नी के रूप मे सोनाक्षी भी काफी परिपक्व हीरोइन नजर आई है कैंसर पीड़ित महिला का दर्द सोनाक्षी ने बहुत ही खुबसूरती से पेश किया है। कलंक के सबसे सीनियर एक्टर संजय दत्त के लिये कुछ खास करने को ही नही था। दुसरी सीनियर एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित बहार बेगम मुजरेवाली के रूप मे नजर आई है इस किरदार मे माधुरी कई जगह पर ओवर एक्ट्रिग करती नजर आई। इसके अलावा चेहरे पर बहुत ज्यादा कास्मेटिक उपचार करने की वजह से माधुरी बूढ़ी नजर आ रही है। अलबत्ता उन्होने कई जगहो पर अच्छा अभिनय किया है और क्लासिकल डांस भी खुबसूरती से किया है

संगीत — फिल्म का संगीत अच्छा बन पड़ा है । इस फिल्म के सारे गाने फिल्म रिलीज से पहले ही हिट हो चुके हैं।

फिल्म देखे या ना देखे—  मल्टी स्टारर फिल्म कलंक एक बार तो देखी ही जा सकती हैं क्योकि इसमे जंहा बडे कलाकार है वही लोकेशन और सेट भी बहुत खुबसूरत है । इसके अलावा सभी का परफॉर्मेंस भी लाजवाब है । लिहाजा सपरिवार कलंक एक बार तो देखी ही जा सकती है ।




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