मूवी रिव्यू- प्यार और बाढ के कहर को दर्शाती केदारनाथ की दिलचस्प कहानी 

Kedarnathp

मूवी रिव्यू      :        केदारनाथ

निर्देशक       :        अभिषेक कपूर

कलाकार      :        सुशांत सिंह राजपूत , सारा अली खान, पूजा गौर,  नितिश भारद्वाज ,

संगीत           :        अमित त्रिवेदी

रेटिंग            :       स्टार (3.5/5)

फिल्म समीक्षा  :   आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

काफी समय से अतिचर्चित फिल्म केदारनाथ की कहानी 2013 मे केदारनाथ मे आई भयंकर बाढ को केद्रित करके फिल्म केदारनाथ बनाई गई है । इस फिल्म की कहानी सच्ची धटना पर आधारित हैं जिसमे हिन्दु मुस्लिम की प्रेम कहानी का मिश्रण डाल कर फिल्म को रंगीन बनाने की कोेशिश की गई है। चूकि फिल्म की कहानी केदारनाथ पर है और फिल्म मे ऐसे हिन्दुत्व वाले स्थान पर मुस्लिम हिदूं का प्यार का तड़का लगाने की वजह से फिल्म लव जिहाद के नाम पर भी चर्चा का विषय बनी हुइ थी । लेकिन फिल्म मे ऐसा कुछ नही है जिससे हिन्दू या मुस्लिम की भावना को ठेस पहुंचे

कहानी —- फिल्म की कहानी केदारनाथ के दर्शन के साथ शुरू हेाती है जंहा पर पिट्ठू मंसूर सुंशांत सिंह राजपूत दर्शन करने आये सवारियो केा लेकर पहाड़ चढता है दर्शन करवाता है उसको  सेल्फी खिंचना भी आता है वो सारे भक्तो की सेल्फी खींचता है और उनको  खुशी खुशी विदा कर देता है। इस रेाजमर्रा की जिंदगी मे पंडित की बेटी मुक्कू अर्थात मंदाकिनी सारा अली खान की एंटी होती हैं । जो नकचढी झगडालू किस्म की मस्तमौला टाइप की लड़की है। मुक्कू का दिल पिट्ठू पर आ जाता है और यंहा से हिन्दु मुस्लमान की लडाई शुरू हेा जाती है मंसूर की वजह से सारे पिट्ठूओ को केदारनाथ छोड़ने के लिये कहा जाता है लेकिन किसी तरह सारा के पिता उसकी शादी उसके मंगेतर के साथ जबरदस्ती करने मे कामयाब हो जाते हैं उसके बाद प्रकृति की मार पड़ती है और केदारनाथ मे भयंकर बाढ आ जाती है और सब कुछ डुबा केले जाती है। इस बाढ मे उन प्रेमियो का कया हेाता है बाढ से केदारनाथ मंदिर बचता है कि नही । इन सभी सवालो का जवाब पाने के लिये आपकेा केदारनाथ देखने थियेटर तक जाना होगा ।

अभिनय —- अभिनय की अगर बात करे तो सारा अली खान पहली ही फिल्म मे गजब का अभिनय करके बाजी मार लेगई हैं सुशांत सिंह राजपूत अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करते नजर आये है उन्होने फिल्म मे पिट्ठू का किरदार निभाने के लिये बहुत मेहनत की है । फिल्म के बाकी किरदार भी अपने हिसाब से सही रहे है।

डायरेक्शन—- फिल्म का डायरेक्शन अभिष्क कपूर ने दिया है जिनका मकसद केदारनाथ मे आये भीषण बाढ को परदे पर दर्शाना था। जिसमे वो बहुत अच्छे तरीके से कामयाब हुए हेै । फिल्म के कई सीन बहुत अच्छे और नेचुरल बन पडे हैं। शुरूवात मे फिल्म थोड़ी धीमी गति से आगे बढती है लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म मे इतने सारे झटकेदार सीन है कि दर्शक अपनी जगह से उठ नही पाते हैं ।

संगीत  —- फिल्म का संगीत अमित त्रिवेदी ने दिया है जो ठीक ठाक है और फिल्म के हिसाब से हैं । बहुत ज्यादा असरदार नजर नही आता ।

फिल्म का प्लस प्वाइंट—- इस फिल्म का प्लस प्वाइंट इस फिल्म की खुबसूरत लोकेशन, तुषार कांति रे का परफैक्ट कैमरा वर्क , बढिया सिनेमेाटोग्राफी,  और खुबसूरत सेट डिजाइनिंग हें जो देखने लायक हैं।  और अगर फिल्म के माइनस प्वाइंट की बात करे तो फिल्म का माइनस प्वांइट फिल्म का फस्र्ट हाफ है जो काफी ढिला नजर आता हैं। फिल्म के डायलाॅग भी बहुत असरदार नजर नही आते । इसके अलावा सबसे माइनस प्वाइंट फिल्म का एंड है जो काफी कमजोर है।

फिल्म देखे कि ना देखे —— केदारनाथ एक बार तो जरूर देखी जा सकती है क्येाकि एक तो इसमे सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान का जवरदस्त परफोरमेंस है। दुसरा फिल्म मे केदारनाथ के दर्शन करने का मौका मिलता है तीसरा केदारनाथ की खुबसूरत वादियो के दर्शन करने केा मिल सकते हैं अगर आप थियेटर मे केदारनाथ देखने जाते हें तो ।




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