मूवी रिव्यू – मणिकर्णिका – खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी

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मूवी रिव्यू     :      मणिकर्णिका –  खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी 

निर्माता        :      कमल जैन

डायरेकटर   :      कृश और कंगना रनौत

संगीत          :      शंकर, एहसान, लॉय 

कलाकार     :      कंगना रनौत, डेैनी डोंजप्पा, कुलभूषण खरबंदा, सुरेश ओबेरॉय, उन्नति दावरा, अंकिता लोखंडे,

रेटिंग           :     स्टार (4/5)

फिल्म समीक्षा  :  आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

जब कोई फिल्म मेकर ऐतिहासिक फिल्म बनाता है तो उसे कई सारी मुसीबतो से गुजरना पड़ता है। फिल्म निर्माण से लेकर फिल्म रिलीज तक फिल्म का निर्माता इसी असमंजस से जूझता रहता है कि फिल्म बन कर रिलीज हो पायेगी कि नही । ऐसा ही कुछ एतिहासिक फिल्म मर्णिकर्णिका के निर्माता-निर्देशक को भी महसूस हो रहा था । लेकिन हजार मुश्किलों के बावजूद एतिहासिक फिल्म मणिकर्णिका भव्य आंरभ के साथ रिलीज हुई हालाकि इस फिल्म को भी रिलीज से पहले काफी सारी परेशानियों से जूझना पड़ा जैसे फिल्म का ओवर बजट होना फिल्म निर्माण मे जरूरत से ज्यादा समय लग जाना । इसके साथ ही इस फिल्म को भी विवादों के घेरे में लेने की कोशिश में करणी सेना का फिल्म मेकर को धमकाना । इन सभी मुसीबतो के चलते फिल्म के निर्माता कमल जैन को भी तबीयत खराब होने के चलते अस्पताल मे भर्ती होना पड़ा । लेकिन जैसा कि कहते हैं अंत भला तो सब भला । तो इस फिल्म के साथ भी ऐसा ही कुछ कहा जा सकता है। मणिकर्णिका झांसी की रानी रिलीज हो चुकी है और फिल्म की रिलीज के साथ ही फिल्म ने तारीफे बटोरना शुरू कर दिया है । फिल्म की सफलता का पूरा श्रेय हालाकि पूरी टीम को जाता है क्योंकि पिछले देो सालो से मणिकर्णिका की पूरी टीम फिल्म निर्माण मे जुटी हुई थी ।और अब फिल्म रिलीज के साथ ही फिल्म को तारीफे भी मिल रही है। अगर फिल्म की सफलता का सबसे ज्यादा श्रेय अगर किसी को जा रहा है तो वो है मणिकर्णिका का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री कंगना रनौत । इस फिल्म को देखने के बाद दर्शकों का यही कहना है कि कंगना  सिर्फ फिल्म मे ही रानी नही बल्कि असल जिंदगी मे भी क्वीन है क्योंकि वे जो भी करती है डंके की चोट पर करती है और कमाल करती हैं ।

कहानी —   फिल्म की कहानी रानी लक्ष्मी बाई की कहानी है  जिनका  शादी से पहले का नाम मणिकर्णिका होता है।और झांसी के राजा गंगाधर राव जिशू सेन गुप्ता से शादी के बाद वो रानी लक्ष्मी बाई बन जाती है । मणिकर्णिका के लिये बचपन से ही भविश्यवाणी हो गई थी कि वो एक अनमोल रत्न है जो इतिहास मे अपना नाम स्वर्ण अक्षरों से लिख कर जायेगी । और ऐसी ही थी झांसी की रानी जो तेज तर्रार बहादूर होने के साथ अति बुध्दिमान भी थी । जिन्हे अपनी झांसी से प्यार था।और वह किसी भी हालत मे अपनी झांसी किसी को देने के लिये तैयार नही थे । झांसी की रानी का उसूल था सर कटा सकते हैं लेकिन सिर झुका सकते नही। अपना ये गर्व उनहोने अंग्रेजो के खिलाफ बगावत के साथ प्रदर्शित किया और उनकी देश भक्ति की भावना देखकर उनका साथ ना सिर्फ मराठा साम्राज्य ने दिया बल्कि मुगल साम्राज्य ने भी उनका साथ दिया मणिकर्णिका की कहानी का एक अहम हिस्सा ये भी है कि अग्रेजो से लड़ने के लिये सेना की कमी के चलते झासी की औरते औरत भी  लड़ाई में शामिल होती हैं और अपने जेवर गहने बर्तन दाव पर लगा कर झांसी को बचाने के लिये हाथेा मे तलबार उठा लेती हैं। फिल्म का आखिरी सीन औरतो मर्दाे जानवरो के साथ अंग्रेजो को खदेडते हुए दिखाया गया है । जो हर किसी के रोंगटे खड़े कर देता है ।

डायरेक्शन —  फिल्म का डायरेक्षन कृश ने किया है लेकिन किन्ही कारणो से कृश को फिल्म बीच मे छोड़नी पड़ी और फिल्म की बागडेार संभाली कंगना रनौत ने । फिल्म के अगर डायरेक्शन की बात करे तो दोनो ही डायरेक्टर ने फिल्म के डायरेक्शन मे कोई कमी नही छोडी है। एक एतिहासिक फिल्म का डायरेक्शन आसान नही होता । लेकिन कृश और कंगना दोनो ही फिल्म का सफल डायरेक्शन करने मे समर्थ रहे हैं।

स्ंगीत —   मणिकर्णिका फिल्म का बेकग्राउड संगीत बहुत ही पावरफुल है । इसके अलावा फिल्म मे दो गाने है जो देशभक्ति का जज्बा पेश करते हैं । विजयी भव गाना देशभक्ति की भावना को पूरी तरह दर्शाता है।

अभिनय — अभिनय की अगर बात करे तो मणिकर्णिका फिल्म की आत्मा है कंगना रनौत । झांसी की रानी के रूप मे अपने अभिनय का भव्य प्रदर्शन करके कंगना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वो अभिनय के मामले मे सब हीरेाइनो की बाप है। अभिनय मे कोई उनका हाथ नही पकड सकता । मणिकर्णिका मे कंगना  हर सीन मे ना सिर्फ बेहद खुबसूरत लगी हैं बल्कि उनके चेहरे के हाव भाव झांसी  की रानी को चरितार्थ करने मे पूरी तरह सक्षम हैं। कंगना  हर सीन मे चाल ढाल युध्द तलवार बाजी धुड़सवारी मे इतनी ज्यादा परफैक्ट लगी हैं कि दर्शक ये कहने पर मजबूर हो जायेगे कि झांसी की रानी कंगना  जेसी ही होगी । फिल्म के बाकी पात्रो ने भी अपनी जगह अच्छा काम किया है। लेकिन कहानी का हर पात्र अगर सिर्फ एक किरदार लगता है तो कंगना रनौत फिल्म की जान नजर आती हैं । लिहाजा ये कहना गलत ना होगा कि कंगणा फिल्म की जान है। आत्मा है।

फिल्म की खास बाते — मणिकर्णिका का फिल्मांकन भव्य तरीके से दिखाया गया है। कई सारे दिल दिल दहलाने वाले और दिल को छूने वाले है। फिल्म की स्क्रिप्ट इतनी उम्दा है कि दर्शक एक मिनट के लिये भी अपनी सीट से उठ नही पाते । फिल्म मे जानवरो तलवारो और अन्य हथियारो का इस्तेमाल बहुत ही खुबसूरती से किया गया है। ये कहना गलत ना होगा कि मणिकर्णिका एतिहासिक फिल्मो मे अपना एक अलग इतिहास रचेगी । इस फिल्म ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कंगना  को अपने आप केा प्रस्तुत करने के लिये किसी बड़े मेकर या बड़े हीरेा की जरूरत नही हैं वो अकेली ही पूरी इंडसर््टी पर भारी हैं ।

फिल्म देखे या ना देखे —- मणिकर्णिका एक बेहतरीन एतिहासिक फिल्म है जो एक शिक्षाप्रद संदेश भी देती है । ये फिल्म दर्शकों को जरूर देखनी चाहिये वर्ना वो एक बेहतरीन फिल्म देखने से बंचित रह जायेगे ।

 




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