मूवी रिव्यु – नोटबुक

NOtebook

मूवी रिव्यु          : शांत और शालीन प्यार को दर्शाती नोटबुक

डायरेक्टर         : नितिन कक्कड़

कलाकार           : जहीर इकबाल, प्रनुतन बहल

शैली                  : रोमांटिक ड्रामा

रेटिंग                : स्टार (2.5/5)

फिल्म समीक्षा : आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

आज इक्सवी सदी मे जब लोग प्यार शादी के बाद भी एक दुसरे पर विश्वास कम ही करते हेैं । आज जंहा पर प्यार कम और धोखा फरेब ज्यादा देखने को मिलता है। ऐसे समय मे सलमान खान प्रोडक्सन  एक साफ सुथरी फिल्म नोटबुक लेकर आये है जिसमे दो प्यार करने वाले एक दुसरे को देखे बिना सिर्फ नोटबुक मे लिखी भावनाओ को पढ कर एक दुसरे से प्यार कर बैठते है । नोटबुक की कहानी साफ सुथरी शालीनता से भरी हुई है लेकिन आज के समय मे कम्प्यूटर युग मे ये थोड़ी गले नही उतरती । फिर भी सलमान खान प्रोडक्शन ने कुछ नया पेश करने की कोशिश की है । जो इस प्रकार है ।

कहानी — फिल्म की कहानी कश्मीर की खुबसूरत वादियो से शुरू होती है जंहा पर कबीर अर्थात जहीर इकबाल को फोन आता है कि उसको अपने पिता के पुश्तैनी घर मे आकर अपने पिता के सपनो को पूरा करना है । जो कि एक ऐसा पब्लिक स्कूल है जिसमे सिर्फ सात बच्चे हैं और ये स्कूल पानी के बीचो बीच है यंहा पर पानी बिजली खाना कुछ भी नही है। पानी और खाने का बंदोबस्त दूर शहर जाकर करना होता है । लिहाजा इस स्कूल मे कोई टीचर पढाने को तैयार नही होता ।और अगर कोई हो भी जाता है तो उसे काली पानी की सजा जैसा अहसास हो ता है इस लिये यंहा पर कोई ज्यादा दिन टिकता नही । लिहाजा अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिये ये जिम्मेदारी कबीर लेता है । इस स्कूल मे पढाने के दौरान उसके हाथ एक नोट बुक लगती है जो कि फिरदौस टीचर प्रनूतन बहल जो कि इस स्कूल मे कबीर से पहले पढाने आई थी उसकी होती है । फिरदौस के फलसफे और भावनाओ को पढ कर कबीर को उससे प्यार हो जाता है । ऐसा ही कुछ फिरदौस के साथ भी हेाता है । इस कहानी की खास बात ये है कि इन दोनों को ही एक दुसरे से प्यार हो जाता है लेकिन इन दोनो ने एक दुसरे की शक्ल नही देखी होती है ।

डायरेक्शन — फिल्म का डायरेक्शन नितिन कक्कड़ ने किया है जो कि पूरी ईमानदारी से किया है लेकिन चुकि फिल्म की कहानी बहुत ही छोटी थी इस लिये फिल्म कही कही ना सिर्फ ढीली पड़ रही थी । बल्कि सीन भी रिपीट लग रहे थे। इस प्रेमकहानी के जरिये डायरेक्टर ने बीच बीच मे कश्मीर के विवादस्पद मुददो को भी हल्के फुल्के ढंग से पेश करने की कोशिश की है। पानी के बीच मे पूरी फिल्म होने की वजह से कश्मीर की वादियो के साथ पूरी तरह न्याय नही कर पाई । पूरी फिल्म धुंधली धुंधली नजर आती है। हीरो हीरोइन भी सीधे सादे थके हुए से पुराने जमाने के नजर आते हैं जिंस वजह से फिल्म की कहानी थोडी पिछडी हुई लगती है।

अभिनय — अभिनय की अगर बात करे तो नवोदित एक्टर जहीर इकबाल और प्रनुतन बहल ने अपना किरदार खुबसूरती से निभाया है । फिल्म मे जो कश्मीर के बच्चे लिये हैं उन्होंने भी अच्छा अभिनय किया है।

संगीत — फिल्म का संगीत ठीक ठाक एवरेज है ।

फिल्म देखे या ना देखे — साफ सुथरा ओैर सच्चा किताबी प्यार पर विश्वास करने वाले प्रेमी या दर्शक ये फिल्म एक बार जरूर देख सकते है। साथ ही इस फिल्म के जरिये कश्मीर की वादियो का मजा भी लूट सकते हैं




Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *