मूवी रिव्यू – पीहू

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मूवी रिव्यू  :        दाे साल की पीहू के मासूमियत से भरे कारनामे दहला के रख देगे दर्शको के दिल  –पीहू 

निर्माता :             राॅनी स्क्रूवाला ,सिध्र्दाथ राय कपूर शिल्पा जिंदाल

निर्देशक :           विनोद कापरी

कलाकार:           मायरा विश्वकर्मा , प्रेरणा शर्मा

संगीत :               विशाल खुराना

जाॅनर :               इमेाशनल थ्रीलर ड्रामा

रेटिंग :              स्टार (4/5)

समीक्षा :           आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

2018 फिल्म इंडस्ट्री के लिये एक बेहतरीन रेवोलूयूशन लेकर उभरा है । क्योकि इस साल ऐसी ऐसी चैकाने वाली बेहतरीन विषय और बेहतरीन कहानी के साथ बेहतरीन मेकिग के तहत फिलमे बन रही है कि दर्शक भी दांतो तले उंगली दबाने से पीछे नही हट सकते । इस रेवोल्यूशन मे एक फिल्म पीहू दर्शको के सामने प्रस्तुत हुई हैं जिसमे एक दो साल की बच्ची ने ना सिर्फ चैकाने वाली एक्टिंग की है बल्कि पूरी फिल्म को अकेले संभाला है चैकाने वाली बात ये भी है कि बेहतरीन डायरेक्शन के चलते आप अपनी जगह से हिल नही पायेगे और बच्ची की मासूमियत से भरी दिल दहलाने वाली हरकतों को देखकर दांतों तले उंगली दबा लेगे ।

कहानी फिल्म की कहानी एक दाे साल की लड़की की बर्थ डे पार्टी के बाद से शुरू होती है जंहा पर पीहू नामक प्यारी सी लड़की की मां ने पीहू के बर्थ डे के बाद ही पति के साथ झगडे के चलते नीदं की गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली है । पीहू की मां बिस्तर मे मरी पडी है और पिता किसी काम से कोलकाता के लिये रवाना हो गये हेैं जो इस बात से अन्जान हेै कि उनकी दाे साल की बेटी धर मे अकेली है और पत्नी मर चुकी है। पीहू की मा उसके सामने मरी पड़ी है लेकिन दाे साल की पीहू को लगता है कि उसकी मां सेा रही हेै। और ये दो साल की लड़की अपनी मां से अपनी तोतली जुबान मे बात करती है मां को मेकअप लगाती है मां से दूध मांगती है दूध ना मिलने पर मरी हुई मा का दूध पीने की कोशिश करती है। इतना ही नही पीहू अपने आप को फ्रिज मे बंद कर लेती है खुद के लिये रेाटी गरम करने के लिये गैस और माइक्रोवेव आॅन कर देती हैं जलती हुई प्रेस को छू तक लेती हैं अपने दोस्तो केा अपनी डाॅल दिखाने के लिये बालकनी के उपर चढ जाती है। ऐसे ही कई दिल दहला देने वाले दृश्यो के साथ पीहू की कहानी दर्शको केा बांधे रखती है। पीहू की कहानी सच्ची धटना पर आधारित है जिसे डायरेक्टर ने बहुत ही सही तरीके से पेश किया है ।

अभिनय ——-  बहुत कम ही हेाता है कि किसी एक ही कलाकार पर पूरी फिल्म आधारित हो । लेकिन पीहू मे ऐसा ही है पीहू की कहानी पीहू अर्थात मायरा विश्वकर्मा के इर्द गिर्द ही धूमती है। छोटी सी बच्ची सब कुछ अपने हिसाब से करती है अकेले ही पूरी फिल्म को अपने छोटे से कंधो पर उठाये चमत्कारी अभिनय के साथ दर्शको के दिलो को दहलाने से पीछे नही हटती । पीहू का अभिनय काबिले तारीफ है इसमे केाई दाे राय नही है।

डायरेक्शन ——- एक जमाने मे पत्रकार रह चुके और कई शाॅट फिल्मस का निर्माण कर चुके डायरेक्टर विनोद कापरी ने गजब का डायरेक्शन दिया है । फिल्म मे एक बच्ची के जरिये ऐसे ऐस सीन किये हैं जो साधारण होते हुए भी दर्शको को टेशन मे डालने के लिये काफी हैं जैसे देा साल की बच्ची द्वारा गैस और माइक्रोवेव आॅन करना फ्रिज मे बंद हो जाना बालकनी की रैली पर चढकर अपनी फै्रडस केा आवाज देना फिनेल को दूध समझ कर बाॅटल मे डाल कर पीने की कोशिश करना । ये सारे सीन इतने साधारण ढंग से शूट किये गये हैं कि ऐसा लगता ही नही है कि डायरैक्टर इसमे कुछ डराने की कोशिश कर रहा है । लेकिन दाे साल की बच्ची के जरिये हुए ये सीन दर्शको की जरूर सांस रेाक देते हेें

संगीत ——  कहानी के मुताबिक फिल्म मे गाने नही है। लेकिन फिल्म मे जो बेैकग्राउड म्यूजिक है वो कहानी के मुताबिक एक दम नेचुरल है जो दर्शको को साधारण हेाते हुए भी डराता है।

फिल्म देखे कि ना देखे —- पीहू एक बेहतरीन फिल्म है जिसे दर्शको केा एक बार जरूर देखना चाहिये । इसकी खास वजह ये है िकइस फिल्म मे एक छोटी सी बच्ची ने कमाल का अभिनय किया है। दुसरा इस फिल्म की कहानी सच्ची धटना पर आधारित है जिसमे ये सीख दी गई है कि आपसी झगड़ो के चलते कोई ऐसा कदम ना उठाए जा आपके साथ आपके मासूम बच्चे को भी ले डूबे । दुसरा शहरो मे लोग अपनी जिंदगी मे इतने मशगूल हेाते हैं कि उनको यही नही होता कि पड़ोस मे कौन रहता है। लिहाजा इस फिल्म मे सीख दी गई है कि आस पड़ोस के लोगो के साथ भी रिश्ता बनाये रखे ताकि वो बुरे वक्त मे काम आ सके

इसके अलावा सबसे खास सीख ये है कि छोटे से बच्चे केा धर मे अकेला बिल्कुल ना छोड़े । वरना इसका नतीजा बहुत ही भयानक हो सकता है।




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