मूवी रिव्यू : राजी

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मूवी रिव्यू : राजी

कलाकार : आलिया भट्ट, विकी कौशल, रजित कपूर, शिशिर शर्मा, जयदीप अहलावत, सोनी राजदान

निर्देशक : मेघना गुलजार

अवधि : 2 घंटा 20 मिनट

रेटिंग : (4/5)

देशप्रेम तो हर इंसान के अंदर है पर देश के लिए मर मिटने वाला कुछ लोग ही है । हिंदुस्तान आज़ाद होने बाद, हिंदुस्तान पाकिस्तान से जो युद्ध हुए थे । उसमे जाने कितने लोग शहीद हो गए थे । जो इतिहास के पन्नो मे अमर हो चुके है।

उसी पन्नो मे से एक कहानी है राज़ी की जो हरिंदर सिक्का के उपन्यास ‘कॉलिंग सहमत से लिया गया है, जो हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच हुए 1971 के युद्ध के बारे में है, जिसे निर्देशक मेघना गुलजार ने अपने कलम से सजाकर फिल्म के जरिये दर्शको को दिखाने की कोशिश की है, बेहतरीन लोकेशन और अच्छी कहानी ने दर्शकों को अपनी सीट पर चिपके रहने के लिए मजबूर करती है।

आलिया की बेहतरीन ऐक्टिंग से फिल्म में चार चाँद लग गया है । देखा जाये तो पूरी फिल्म आलिया भट्ट पर है जिसे पूरी फिल्म को अपने कंधे पर लेकर चलती हैं, आलिया भट्ट की खूबसूरती और मासूमियत ने तो दर्शको का दिल जीत लिया है ।

कहानी : जब पाकिस्तान  हिंदुस्तान को तबाह करने के मंसूबों को लेकर युद्ध की तैयारी और इसका तान-बाने बुन रह होता है। इसकी भनक एक कश्मीरी बिज़नसमैन हिदायत खान को लग जाती है। हिदायत व्यापार के सिलसिले में अक्सर  हिंदुस्तान से पाकिस्तान आया-जाया करता है और उसकी पाकिस्तानी आर्मी में ब्रिगेडियर परवेज सैय्यद से अच्छी दोस्ती है। हिदायत खान अपनी बीमारी का वास्ता देकर वतन की रक्षा के लिए एक बड़ा फैसला लेता है। वह अपनी बेटी सहमत के लिए ब्रिगेडियर से उनके बेटे इकबाल का हाथ मांगता है, जो एक आर्मी ऑफिसर है। सहमत कश्मीरी लड़की है, जिसे पता तक नहीं कि उसके पिता उसका भविष्य पाकिस्तान में लिख आए हैं। हालांकि वतन के लिए परेशान पिता को देखकर सहमत इस रिश्ते के लिए हां कहने में देर नहीं लगाती है।

सहमत अब अपने पिता और वतन के खातिर पाकिस्तान में भारत की आंख और कान बनकर रहने को तैयार है। इससे पहले सहमत खुद को एक जांबाज जासूस बनने की तैयारी में झोंक देती है और उसे पाकिस्तान से इस लड़ाई के लिए तैयार करते हैं रॉ एजेंट खालिद मीर । इकबाल से सहमत की शादी होती है और वह एक बेटी से बहू बनकर  हिंदुस्तान की दहलीज पार करती है। एक दुश्मन देश में मौजूद अपने ससुराल और अपने शौहर के दिल में जगह बनाती हुई सहमत इसी के साथ-साथ पाकिस्तान आर्मी में चल रहे षड्यंत्रों की जानकारी  हिंदुस्तान तक पहुंचाने में कामयाब होती है। एक आर्मी परिवार के बीच रहकर यह सब कर पाना सहमत के लिए मुश्किल साबित होता है। इस दौरान उसे कई ऐसे फैसले भी लेने पड़ते हैं, जिसके बारे में उसने कभी सोचा तक नहीं था। इस पूरी कहानी के बीच एक छोटी से प्रेम-कहानी भी पनपती है, जो सहमत और इकबाल की है। फिल्म में कमी की बात करें तो कहानी काफी तेज रफ्तार से आगे बढ़ती है। फिल्म के साथ-साथ आपको इसकी आगे की कहानी का भी अंदाज़ा आसानी से लगने लगता है।




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