मूवी रिव्यू- फन्ने खां हल्की फुल्की मस्ती मजाक से भरी है

fanney khan

मूवी रिव्यू  :  फन्ने खान

निर्माता : टी सीरीज

निर्देशक :  अतुल मांजरेकर

संगीत : अमित त्रिवेदी

कलाकार : अनिल कपूर , एश्र्वया राय बच्चन , राजकुमार राव ,दिव्या दत्ता ओैर नवोदित पीहू सैंड

जाॅनर:  एंटरटेनमेंट ड्रामा

रेटिंग :  स्टार (3.5/5)

फिल्म समीक्षा  :  आरती सक्सेना , एडिटर अमित बच्चन

हिन्दुस्तान मे जंहा टेलेन्ट की कमी नही है वही लोगो के सपने भी बहुत बड़े बड़े हैं और जब वो सपना किसी मजबूरी वश अधूरा रह जाता है तो हम उसे दुसरे के जरिये पूरा करने की कोशिश करते हैं अैार ऐसे मे जिस तरह इश्क और जंग मे सब जायज माना जाता है। वैसे ही कला के कद्रदान अपने मकसद को पूरा करने के लिये किसी भी हद तक जा सकते हेेैं ये हम नही कह रहे बल्कि कहना है फन्ने खान का जो खूद एक कामयाब सिंगर नही बन सके इस लिये अपना वो सपना अपनी बेटी के जरिये पूरा करना चाहते हेैं  वेा बेटी जो अपने मोटापे को लेकर परेशान है और मोटे होने की वजह से बार बार बेइज्जती सहती है। वही  फन्ने खान  जो पैसे से कमजोर हैं लेकिन बेटी को गायिका बनाने के लिये कर्जा तक लेने केा तैयार है।और तो और वो किसी का किडनेप करने से भी बाज नही आते । तो ऐसे है हमारे फन्ने खान ।

कहानी … फिल्म की कहानी शुरू होती है फन्ने खान अर्थात प्रशांत से जो एक आर्केस्टा मे गाने वाला सिंगर है और एक बड़ा सिंगर बनना चाहता है लेकिन जिंदगी की भागादौैडी मे वो सिंगर नही बन पाता और एक फैक्टरी मे मजदूरी करने लगता है जंहा पर उसका खास दोस्त अधीन उसके टेलेन्ट केा प्रेात्साहित करता है। फन्ने खान अपनी कला का गला धंोट कर काम धंधे मे मशगूल हो जाता है और उसी दोरान उसको एक बेटी पेैदा हेाती है जिसमे वो अपने सपने देखने लगता है । फन्ने खा बेटी को हाथ मे लेकर कहता है कि वो मोहम्मद रफी तेा नही बन सका । लेकिन अपनी बेटी को लता जरूर बनायेगा ।लेकिन हालात बिगड़ जाते है। उसके पास बेटी का एलबम बनाने के लिये पैसे नही हेातेे और ऐसे मे फन्ने की नौकरी भी चली जाती है। ऐसे मे फन्ने खान  टैक्सी चलाने लगता है एक दिन उसकी टैक्सी मे प्रसिद्ध गायिका बेबी सिंह आकर बैठती है और फन्ने खां उसका किडनेप कर लेते है। उसके बाद शरीफ होेने की वजह से वो किडनैप की हुई बैबी सिंह अर्थात एश्र्वया राय की ऐसे सेवा करते है। जैसे वो उसको मेहमान बनाकर लायेे हो । ऐसे ही कहानी आगे बढती है फन्ने खान का अपनी बेटी केा गायिका बनाने का सपना पूरा हेाता है कि नही ? बैबी सिंह के साथ फन्ने खान क्या सुलूक करता है ? ऐसे ही कई सवालो के जवाब पाने के लिये फन्ने खान देखने थियैटर तक जाना होगा ।

डायरेक्शन …… फन्ने खान की कहानी हल्की फुल्की मनोंरजन से भरपूर बनाने की पूरी कोशिश डायरेक्टर अतुल मंाजरेकर ने की थी लेकिन फिल्म मे प्रसिध्द सिंगर एश्र्वया राय बच्चन की किडनेपिंग ,रिसेशन ,टी आर पी की लड़़ाई, कास्टिंग काउच, आदि कई सारी चीजो केा एक साथ ऐसे शामिल कर लिया है कि फिल्म की कहानी पुलाव के बजाय दाल खिचडी नजर आती है। डायरेक्टर ने अपने डायरैक्शन के जरिये फिल्म को मनोंरजक बनाने की पूरी कोशिश की है लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और गलत मैसेज देने के चलते डायरेक्टर अपने काम से भटक गये। अगर वो चाहते तो फिल्म को एक ही धारा मे बहाते हुए खुबसूरती से भी पेश कर सकते थें लेकिन कहना ना होगा कि फिल्म मे टाप क्लास एक्टरो के होने के बावजूद किसी के भी अभिनय मे ठहराव नजर नही आता । ओवर एंड आॅल फिल्म ना तो कामेडी लगती है ना ही इमेाशनल लगती है । और ना ही प्रेरणादायक लगती है बस फन्ने खान की कहानी ऐसे ही चलती जाती है।

अभिनय .. अगर अभिनय की बात करे तो अनिल कपूर ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करने की केाशिश की है लेकिन उनका काम उतना असरदार नही था जितना की होना चाहिये । इसमे अनिल कपूर की कोई गलती नही है बल्कि कहानी और संवाद मे दम खम नही था । बैबी सिंह के किरदार मे एश्र्वया राय बच्चन पूरी तरह ओवर एक्टिंग करती नजर आ रही है। बालीवुड के नामचीन एक्टर राजकुमार राव जो आज कल अपने अभिनय की वजह से चर्चा मे कुछ ज्ंयादा ही रहते हैं वेा इस फिल्म मे लल्लू टाइप नजर आये हैं जो एक टाप क्लास खुबसूरत सिंगर केा पटाने का दम खम भी रखते हैं नवोदित एक्र्टेस पीहू सैड जिन्होने इस फिल्म के लिये खास तौर पर अपना वजन 20 किलो बढाया हैं उनहोने अपने किरदार केा बखूबी निभाया है। बाकी सब फन्ने खान मे ठीक ठाक काम कर गये ।

संगीत … अमित त्रिवेदी का संगीत कर्णप्रिय है लेकिन दिल को छूने वाला नही लगता । बल्कि चलताउ गाने लगते है। जैसे मेरे जैसा तू है । जवा है माहब्बत आदि । लता की आवाज मे गाना गाने वाली पीहू उषा उत्तुप स्टाइल की आवाज मे गाना गाती नजर आती हैं

फिल्म देखे कि ना देखे । फन्ने खान एक बार तो अवश्य देखी जा सकती हैं क्येािक एक तो फिल्म मे अनिल कपूर राजकुमार राव और एश्र्वया राय बच्चन जेसे दिग्गज कलाकार है । जिनके कई सारे फैन्स है। इसके अलावा भले ही फिल्म की कहानी बहुत ज्यादा दमदार नही हैं लेकिन इसे पूरी तरह बोर फिल्म भी नही कहा जा सकतां क्येाकि कलाकारो ने कमजोर कहानी को अपने दिलचस्प अंदाज से मजबूत बनाने की पूरी केाशिश की है। फिल्म का संगीत भी कैची और मनोंरजक है। इस हिसाब से एक बार फन्ने खान केा देखने का रिस्क लिया जा सकता है।

 




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