मूवी रिव्यू – पैडमैन

padm1मूवी रिव्यू – पैडमैन
कलाकार – अक्षय कुमार, (लक्ष्मीकांत चौहान) राधिका आप्टे, (गायत्री ) सोनम कपूर (परी)
निर्देशक – आर बाल्की
कैमरामैन -पी सी श्रीराम
संगीतकार – अमित त्रिवेदी
रेटिंग – ****

बॉलीवुड का सबसे बड़ा स्टार खिलाड़ी अक्षय कुमार ने पैडमैन जैसे फिल्म बनाकर बड़े ही हिम्मत का काम किया है अब तक बॉलीवुड मे इस विषय पर फिल्म बनाने की बात किसी ने भी सोची तक नहीं, ये फिल्म करके अक्षय कुमार हीरो से सुपरहीरो बन गए हैं. अक्षय कुमार जब की साल में 4 से 5 फिल्में करते हैं और फिल्म इंडस्ट्री को लगभग 500 करोड़ का बिजनेस देते हैं. अक्षय कुमार को सबसे ज्यादा मेहनत करने वाला ऐक्टर माना जाता है ,अक्षय ने अपने करियर में अब तक 130 से भी ज्यादा फिल्में की है , और फिल्म ‘रुस्तम’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया.

अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन इंटरटेनिंग और सच्ची कहानी पर आधारित है तमिलनाडु के रहने वाले अरूणाचलम मुरूगनाथम के ऊपर बनी है जिन्होंने सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीन का आविष्कार किया. इनकी कहानी को ट्विंकल खन्ना ने अपनी किताब -द लीजेंड आफ लक्ष्मी प्रसाद – में लिखी है और इसके निर्देशक है आर. बाल्की

पैडमैन की कहानी पीरियड जैसे मुद्दे पर है जिसके बारे मे लोग बात तक नहीं करना चाहते , माहवारी के पांच दिन कुछ औरतों द्वारा गंदा कपड़ा, राख, पत्ता आदि का उपयोग करती है इससे कई बड़ी बीमारियां फैलती हैं

लक्ष्मीकांत चौहान अपनी पत्नी से बेइंतहा मोहब्बत करता है. जैसे ही पता चलता है कि उसकी पत्नी गायत्री अपने पीरियड्स (माहवारी) के दौरान गंदे कपड़ों का इस्तेमाल करती है तब वे इस बात को लेकर परेशान हो जाता है. कही गंदे कपड़ों से गायत्री को कुछ हो न जाए इसलिए सैनेटरी पैड लाकर देता है लेकिन कीमत देखकर गायत्री इसे इस्तेमाल करने से मना कर देती है. इसके बाद लक्ष्मी को आइडिया आता है एक पैड को खोलकर देखता है, तो उसे पता चलता है कि मलमल के कपड़े के अंदर कुछ रूई/कपास लपेटा गया है. वह खुद सैनिटरी पैड बनाने की कवायद में जुट जाता है। बार-बार कोशिश करने पर भी वे वैसा पैड नहीं बना पाता और मां, पत्नी, बहन, के तिरस्कार का सामना करना पड़ता है फिर वे सैनेटरी पैड की मशीन बनाने की ठान लेता है

परिवार को छोड़ कर शहर चला जाता है, एक प्रोफेसर के घर पर नौकरी करने लगता है. जहां प्रोफेसर के बेटे की सलाह पर कम्पयूटर पर गूगल की मदद से अमेरिका व मलेशिया से पैड बनाने में उपयोग होने वाला पदार्थ मगाता है और नब्बे हजार में पैड मशीन बनाता है . इस मशीन की मदद से सैनेटरी पैड बनता है इसके बाद अचानक उसकी ज़िंदगी में परी की एंट्री होती है और पैड के इस्तेमाल जैसी जिस छोटी सी बात को लक्ष्मी औरतों को नहीं समझा पाता वो परी चुटकियों में समझा देती है

परी के पिता IIT में है. परी के कहने पर उसके पिता दिल्ली में आयोजित समाज उपयोगी नई खोज प्रतियोगिता में लक्ष्मी को उसकी मशीन के साथ बुलवाते है और लक्ष्मी को 2 लाख रुपए का पुरस्कार मिलता है

लक्ष्मी को यूएन (यूनाइटेड नेशंस) में स्पीच देने के लिए बुलाया जाता और वहां पर लक्ष्मी जो बोलता है वो बातें सुनने वालों के दिल में उतर जाती हैं. लक्ष्मी टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में कहता है- ‘जब आपकी मां, बहन और बेटी मजबूत होती हैं तब देश मजबूत होता है.’ ये एक लाइन बहुत बड़ा संदेश देती है. वापस भारत लौटते पर भारत सरकार उसे पद्मश्री अवॉर्ड देती है , उम्मीद है कि फिल्म देखने के बाद ना पैड मांगने वाला शर्माएगा और ना ही देने वाला.

इस फिल्म के निर्देशक आर. बाल्की हैं फिल्म की कहानी भी बाल्की ने ही लिखी है. गायत्री यानि राधिका आप्टे अपनी भूमिका से इस फिल्म में जान डाल दी है. वहीं सोनम कपूर के लिए भी ये फ्रेश स्टार्ट है. इसमें आधी फिल्म में राधिका है और बाकी में सोनम हैं और दोनों ने ही अपना दम दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

फिल्म का म्यूजिक अमित त्रिवेदी ने दिया है और गीत कौसर मुनीर ने लिखे हैं. सारे ही गाने बहुत प्यारे हैं और सुनने में भी अच्छे लगते हैं.

padman b.

akiii




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